अपने रुठेंगे तो मना लेंगे हम ,होगी खता तो सजा लेंगे हम ,
- पर कदम जो बढेंगे आगे फिर कैसे पीछे हतालेंगे हम?
- होगा जो अँधेरा तो दिया जला लेंगे हम ,मुस्कराहट के पीछे आसू छुपा लेंगे हम,
- पर जब दर्द होगा अपनों को हमारे कारन तो ये कैसे सहेंगे हम?
- लगे की चोट तो मरहम लागा देंगे हम,होंगे कांटे किसी के कदमो में तो खुदको भी बिशा देंगे हम,
- पर अगर हम ही कांटा बनजाये किसी की राह का तो कैसे हटेंगे हम ,
- यु to हर ज़ख़्म युही सह लेंगे हम,अपनों की आँखों से आसू पोच लेंगे हम,
- पर अगर हम ही आँखों में खटकने लगे किसीकी तिनका बनकर तो कैसे निकालेंगे हम,
- हर मौसम का रुख नही बदल सकते हम ,बस खुद हर मौसम में घुल जायेंगे ,
- सबके लबो की हसी महसूस करके खुदको भी हँसा लेंगे हम ,
- मिलजाए अपनों को ख़ुशी हमसे तो मौत को भी ख़ुशी से गले लगा लेंगे हम.....
Saturday, December 26, 2009
अपनो के लिए ...
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