Friday, December 25, 2009

तलाश .....

मुझे इन अंधेरो में एक रौशनी की तलाश हैं,
मुझे इस अजनबी दुनिया में किसी अपने की तलाश हैं,
मुझे सहारे की नही हमकदम की तलाश हैं ,
मुझे तो बस इस निराशा में एक आशा की तलाश हैं,
कदम तो चल पड़ी हु कई मगर मुझे तो अपनी मंजिल की तालाश है ,
हर राह में कांटे हे बीशे जहा हो फूलो ki क्यारी मुझे उस रास्ते की तलाश है,
चोट तो खाता हर कोई है मरहम लगा सके उसे मुझे उस अपने की तलाश है ,
धीरे धीरे सपने मेरे टूट नजाए बस पुरे कर सकू kuch सपने mujhe उस नींद की तलाश है,
कोई मुझसे मुह न मोड़ ले उसे पहले एक तन्हाई की तलाश है,
न चआहते हुए भी उठाने पड़ते हे कुछ कदम न हो अफ़सोस उनपर बस ऐसे ही विश्वास की तलाश है,
रुक रुक कर बड़े हे ज़िन्दगी में आगे जिंदगी न रुक जाये ऐसे जज्बे की तलाश है,
मुझे कुछ मिले न मिले बस इस निराशा में एक आशा की तालाश है,
मुझे इस मतलबी दुनिया में किसी मतलब की तलाश है,
जी सकू में सुकून से बस मुझे इसीलिए किसी मकसत की तलाश है,
मुझे इस निराशा में कीसी आशा की तलाश है ......






1 comment: