कोई इंसान भी जिंदगी में इतना महत्व रख जाता हैं ,
कोई न कोई लम्हा उस इन्सान की कमी का एहसास दिलाता है
यूँ तो कोई कदम मुश्किल नही चलना ,फिर भी कई कदम चलने पर ये दिल किसी न किसीका साथ चाहता है
क्या ज़रूरत हे माना हर मौड़ तो सीधा नही मगर चलते चलते तो इंसान सिख ही जाता है,
गलती इंसान की नहीं इंसानियत की हइ हे सब कुछ भुलाकर बस इंसान फ़र्ज़ निभाता है,
खुदके के पास हो न कोई ख़ुशी फिर भी सबके गम में साथ निभाजता है .
आसू छुपाकर सबके अश्क पोछने पहुच जाता है,
ये मज़बूरी हे या आदत की जिसके लिए सब करो वो ही उसे कभी समझ नहीं पता है ,
कई देर न होजये ये डर लगता हे बस करीब हो कोई क्यों ये हर कोई चाहता है
ज़िन्दगी अकेले नहीं गुज़रती हर कोई ये ही कह जाता हे ,क्यों क्यों बस येही सवाल मेरे दिल में रह जाता हे,
इतने रिश्ते मिले हे सौगात में हमे फिर भी कोई अपनों से भी अपने का इंतज़ार रह जाता है ,
कोई तो जवाब देदे मुझे क्या करे जीना हे तनहा हमे अगर ,क्यों हर हालात हमे कुरेद कुरेद कर मनमे कई खवाईशे जगा जाते है,
बस ये वक्त कई सपने दिखता हे खुसनसीब होता हे वो जिसके पुरे हे होते हे सपने ,और जो हो बदनसीब वो तनहा ही था और तनहा ही रह जाता ,,,,,,,
( किसीको इतनी एहमियत मत दो अपनी ज़िन्दगी में की वो आपकी ज़िन्दगी से बढकर हो जाये क्या हे आपकी ज़िन्दगी भूल जाओ जीना उसे और ये वक्त भी न साथ निभाए और अगर खुशनसीबी से कोई रिश्ता मिले तो उसे खोने मत दो आखिरी सास तक उसका साथ निभाओ कयुकी हर कोई खउश्नासिब नही होता ना )
