Saturday, January 30, 2010

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कोई इंसान भी जिंदगी में इतना महत्व रख जाता हैं ,

कोई न कोई लम्हा उस इन्सान की कमी का एहसास दिलाता है

यूँ तो कोई कदम मुश्किल नही चलना ,फिर भी कई कदम चलने पर ये दिल किसी न किसीका साथ चाहता है
क्या ज़रूरत हे माना हर मौड़ तो सीधा नही मगर चलते चलते तो इंसान सिख ही जाता है,

गलती इंसान की नहीं इंसानियत की हइ हे सब कुछ भुलाकर बस इंसान फ़र्ज़ निभाता है,

खुदके के पास हो न कोई ख़ुशी फिर भी सबके गम में साथ निभाजता है .

आसू छुपाकर सबके अश्क पोछने पहुच जाता है,

ये मज़बूरी हे या आदत की जिसके लिए सब करो वो ही उसे कभी समझ नहीं पता है ,

कई देर न होजये ये डर लगता हे बस करीब हो कोई क्यों ये हर कोई चाहता है

ज़िन्दगी अकेले नहीं गुज़रती हर कोई ये ही कह जाता हे ,क्यों क्यों बस येही सवाल मेरे दिल में रह जाता हे,

इतने रिश्ते मिले हे सौगात में हमे फिर भी कोई अपनों से भी अपने का इंतज़ार रह जाता है ,

कोई तो जवाब देदे मुझे क्या करे जीना हे तनहा हमे अगर ,क्यों हर हालात हमे कुरेद कुरेद कर मनमे कई खवाईशे जगा जाते है,

बस ये वक्त कई सपने दिखता हे खुसनसीब होता हे वो जिसके पुरे हे होते हे सपने ,और जो हो बदनसीब वो तनहा ही था और तनहा ही रह जाता ,,,,,,,

( किसीको इतनी एहमियत मत दो अपनी ज़िन्दगी में की वो आपकी ज़िन्दगी से बढकर हो जाये क्या हे आपकी ज़िन्दगी भूल जाओ जीना उसे और ये वक्त भी न साथ निभाए और अगर खुशनसीबी से कोई रिश्ता मिले तो उसे खोने मत दो आखिरी सास तक उसका साथ निभाओ कयुकी हर कोई खउश्नासिब नही होता ना )

Sunday, January 24, 2010

में बदल सकती...

में बदल सकती तो अपनी किस्मत बदलती ,

में बदल सकती तो क्या क्या नहीं बदलती हर मकसत हर लम्हा बदलती जो किसीको दर्द देता हो

में बदल सकती तो कोई बुराई न रहने देती जिससे दुखता हो किसीका दिल वो बात न होने देती

में बदलती सकती तो रास्ते बदलती जिसे लगती हो मंजिल दूर वो राह करीब कर देती

में बदलती तो नजाने क्या बदलती पर हर वो शक्सियत बदलती जो बुराई दिखाती हो

में बदल सकती तो अपने ब्रहम को बदलती खुशियों के इंतजार में गुज़री रातो को बदलती

में बदल सकती तो लोगो की सोच को बदलती अनकही जुबन सी बातों को बदलती

में बदल सकती तो हर डर को बदलती अपनों के ऊपर गेरो की एहमियत को बदलती

में बदल सकती तो शयद सबसे पहले खुदको ही बदलती अपनी ही सोच को बदलती
में बदल सकती तो क्या क्या न बदलती अकेलेपन में किसीकी गुज़री रात को बदलती

में बदल सकती तो खुशनुमा हर ज़िन्दगी को करती खुद भी मुस्कुराती औरो का भी दिल; न दुखाती ,

में बदल सकती तो अपनों की उनं गलतियों को बदलती जो दर्द का रास्ता दिखाती हे ]

मत पूछो में बदल सकती तो क्या क्या बदलती हर कांटे को फूल में बदलती

सचमें अगर बदल सकती तो सबसे पेहले अपनी किस्मत को बदलती .......................

Saturday, January 9, 2010

मेरे सपनो का शहर....


एक शहर ऐसा बनाऊ जहा सिर्फ खुशियों का डेरा हो ,एक शहर ऐसा बनाऊ जहा हर वक्त सवेरा हो,

जी करता हे एक शहर ऐसा बनाऊ जहा सिर्फ प्यार ही प्यार हो ,एक शहर जहा कोई न इंतज़ार हो,

एक शहर जहा जीने की चाह हो ,एक शहर जहा ज़िन्दगी का सार हो ,

वो शहर बनाना चाहती हु मैं जहा सपनो की खुली किताब हो ,जहा हकीकत में भी जीने का जज्बात हो,

एक शहर जहा मुस्कुराती सुबह हो ,एक शहर जहा कोई न अकेली रात हो ,

एक शहर जहा पूरा हर खवाब हो ,एक शहर जहा बिना पानी की बरसात हो ,

एक शाहर जहा मासूमियत ही मासूमियत हो ,एक शाहर जहा हर बचपन आजाद हो,

एक शहर जहा सब कुछ आसान हो ,एक शाहर जहा कोई न निराश हो,

एक शहर जो अपनों का शहर हो ,एक शहर जहा खुशियों की लहर हो ,

मेरा वो शहर जहा बस अपनों का प्यार हो हा वो शहर जिसका सपना दिन रात आता है मुझे,

वो शहर बना चाहती हु मैं जहा मेरे दिल की आवाज़ पहचान सकू ,वो शहर जहा खुदसे इन्साफ कर सकू,

वो शहर जहा भीड़ में अकेली न राहू बल्कि अकेलेपन में भी महफ़िल बनालू,

वो शहर जहा सपनों की वो दुनिया हो ,जिसे में अपने रोम रोम में सजा लू,

वो शहर जहा कोइ न पराया हो ,वो शहर जहा अपनों का ही साया हो,

वो शहर जहा में सबको अपना बनालू ,वो शहर जहा में सबकी दर्द मिटा दू,

वो शहर जहा में सबके अश्क शिन लू ,एक शहर जहा सबको मुस्कुराना सिखा दू ,

एक शहर जहा मैं सारी खुशिया अपनी बाहों में समेत सकू,एक शहर जहा मैं मैं बनके रह सकू,

बस वो शहर ही तो बनाना चाहती हु मैं जहा कोइ न उदासी हो ,न कोइ शिकवा ,न शिकायत न किसी की आँखों में नामी हो ,

बस मेरे सपनों का शहर बनाना चाहती हु ,हाँ बस ऐसा ही शहर बनाना चाहती हु मैं......