Wednesday, December 30, 2009

क्या जानू कौन हु मैं..? 13/12/09

क्या जानू कौन हु मैं?
किस माला की डोर हु मैं?
अपनों के बिच में गैर सी लगती हु ,बारिश में भी पतझड़ सी लगती हु ,
हर सुबह में रात का अँधेरा देखती हु ,भरी किताब में एक कोरा कागज़ हु मैं,
चलती साँसों में मौत का एहसास सी लगती हु,बेरंग हे दुनिया मेरी बेजुबा हे हर लफ्ज़ मेरा,
दिल से धड़कने गूम सी गयी हे, नहीं जानती हु कौन हु मैं?
किस पहली का जवाब हु मैं,किस रात का ख्वाब हु मैं, क्या जानू कौन हु मैं?
हर ख़ुशी में दर्द सी लगती हु,सबकी आँखों में अश्क सी लगती हु,
अमृत में भी ज़हर सी लगती हु,हारे हुए किसी खेल सी लगती हु,
में कुछ भी नहीं बस मिटटी के एक ढेर सी लगती हु,क्या जानू कौन हु मैं?
क्वाबो में टुटा अकेला ख्वाब हु मैं,नहीं कोई सहारा मेरा एक दरिया शोर हु मैं,
ना कोई उम्मीद हे मुझसे , ना कोई विश्वास हे मुझपे,
टुटा हर विश्वास हु मैं,बिखरा कोई जज़्बात हु मैं,
हर ज़ख़्म हे मुझसे ही शायद ,कट गए हे पंख मेरे तिनका- तिनका भिखर सी गयी हु मैं,
बचा नहीं कुछ मेरे पास अब ,नहीं जानती कौन हु मैं....?

Sunday, December 27, 2009

क्यों ...

जब में अकेली चलती हु राहो में क्यों कोई हाथ मुझे थामकर आगे नही बदाता ,

क्यों जब में दुन्द्ती हु कोई सहारा तो हर कोई मुझे तनहा हे छोड़ जाता,

जब ये दिल माननेलगता हे किसीको अपना तो वो इस दिल को हे तोड़ जाता ,

क्यों जब हम किसी क करीब हो जाते हे तो वो हमसेइतनी दूर हे चला जाता हे,

आदत तो हे इन गुमो को सरहाने की मगर फिर भी हरबार ये दर्द नया सा लगता हे,

क्यों हर कोई अपना बनकर कभी कोई रिश्ता ही नही निभाता.......

Saturday, December 26, 2009

अपनो के लिए ...

  • अपने रुठेंगे तो मना लेंगे हम ,होगी खता तो सजा लेंगे हम ,
  • पर कदम जो बढेंगे आगे फिर कैसे पीछे हतालेंगे हम?
  • होगा जो अँधेरा तो दिया जला लेंगे हम ,मुस्कराहट के पीछे आसू छुपा लेंगे हम,
  • पर जब दर्द होगा अपनों को हमारे कारन तो ये कैसे सहेंगे हम?
  • लगे की चोट तो मरहम लागा देंगे हम,होंगे कांटे किसी के कदमो में तो खुदको भी बिशा देंगे हम,
  • पर अगर हम ही कांटा बनजाये किसी की राह का तो कैसे हटेंगे हम ,
  • यु to हर ज़ख़्म युही सह लेंगे हम,अपनों की आँखों से आसू पोच लेंगे हम,
  • पर अगर हम ही आँखों में खटकने लगे किसीकी तिनका बनकर तो कैसे निकालेंगे हम,
  • हर मौसम का रुख नही बदल सकते हम ,बस खुद हर मौसम में घुल जायेंगे ,
  • सबके लबो की हसी महसूस करके खुदको भी हँसा लेंगे हम ,
  • मिलजाए अपनों को ख़ुशी हमसे तो मौत को भी ख़ुशी से गले लगा लेंगे हम.....

मेने भी कई सपनो को देखा हे...


मेने भी कई सपनो को देखा हे ,अनजाने रास्ते में अपनों को देखा हे ,

एक सपना नयी राह चुने का ,एक सपना आसमान को शुने का,

एक सपना समुन्दर किनारे का,एक सपना लहरों पे अपना घर बनाने का ,

एक सपना हर मुश्किल को आसान बनाने का,एक सपना अपनी मजिल को पाने का,

एक सपना बारिश की बूंदों को अपनी हथेलियों में समाने का,एक सपना उन बूंदों से मोती बनाने का,

एक सपना खुशियों को पाने का,एक सपना सबके आसू चुराने का ,

एक सपना फूलो पे चलने का ,एक सपना उन फूलो से अपना महल बनाने का,

एक सपना सितारों को शुने का ,एक सपना उन सितारों से खेलने का ,

एक सपना परियो के शहर जाने का ,एक सपना पारी बनके सबके दर्द दूर करने का,

एक सपना फिर बचपन में खो जाने का ,एक सपना नन्ही सी दुनिया सजाने का ,

एक सपना सबका प्यार पाने का ,एक सपना प्यार निभाने का ,

एक सपना अपनी बाहों में हर ख़ुशी समेत लेनेका ,एक सपना खुली आज़ादी से उद्दान भरने का,

एक सपना सारे सपने पुरे होते देखने का,एक सपना नए सपने संजोने का ,

हां मेने भी इन सपनो को देखा हे ,अनजाने रास्ते में कई अपनों को देखा हे ........




Friday, December 25, 2009

तलाश .....

मुझे इन अंधेरो में एक रौशनी की तलाश हैं,
मुझे इस अजनबी दुनिया में किसी अपने की तलाश हैं,
मुझे सहारे की नही हमकदम की तलाश हैं ,
मुझे तो बस इस निराशा में एक आशा की तलाश हैं,
कदम तो चल पड़ी हु कई मगर मुझे तो अपनी मंजिल की तालाश है ,
हर राह में कांटे हे बीशे जहा हो फूलो ki क्यारी मुझे उस रास्ते की तलाश है,
चोट तो खाता हर कोई है मरहम लगा सके उसे मुझे उस अपने की तलाश है ,
धीरे धीरे सपने मेरे टूट नजाए बस पुरे कर सकू kuch सपने mujhe उस नींद की तलाश है,
कोई मुझसे मुह न मोड़ ले उसे पहले एक तन्हाई की तलाश है,
न चआहते हुए भी उठाने पड़ते हे कुछ कदम न हो अफ़सोस उनपर बस ऐसे ही विश्वास की तलाश है,
रुक रुक कर बड़े हे ज़िन्दगी में आगे जिंदगी न रुक जाये ऐसे जज्बे की तलाश है,
मुझे कुछ मिले न मिले बस इस निराशा में एक आशा की तालाश है,
मुझे इस मतलबी दुनिया में किसी मतलब की तलाश है,
जी सकू में सुकून से बस मुझे इसीलिए किसी मकसत की तलाश है,
मुझे इस निराशा में कीसी आशा की तलाश है ......






Tuesday, December 22, 2009

माँ !!!!!!!!!!






इन बाहों सा सुकून कहा मिलेगा ,माँ के प्यार जैसा प्यार कहा मीलेगा,
आखो में दर्द भरके भी मुस्कुराहट हमारी लाये एसा मासूम कहा मिलेगा ,
बचपन से तुम्हे लाड लगाए बड़े हो तो डाट से बचाए ,
तुम पे हो गुस्सा फिर तुम्हे ही गले लगाए,
चोट खाए हम और वो आंसू बहाए ,ये संस्कार कहा मिलेगा ,
दर्द हो तुम्हे जब छुए तुम्हे प्यार से वो हर दर्द ये दिल भूल जाये ,
हार हो तुम्हारी कभी तो फिर भी तुम्हे ही विजेता बनाए,
तुम्हे समझाकर तुम्हे सिने से लगाए ,ये दुल्हार कहा मिलेगा,
बस ये सोच कर मेरा दिल ये कह्जाये
क्यों न वो बचपन फिर लौट आये ,मुझे वो माँ का प्यार कुछ दिन और मिलजाए
एक बार फिर माँ मुझे गुडी में उठाये,काश वो अमर हो जाये ,
मेरी माँ का प्यार मुझे ज़िन्दगी भर के लिए मिलजाए .........


Monday, December 21, 2009

काश !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

16-7-08
काश में एक परिंदा होती,इतनी आजाद की बिन सीमाओंकी उड़ान भारती ,
काश में नदिया होती इतनी पावन की मेरी सिसकिया भी लहरें कहलाती ।
काश में बारिश होती इतनी निर्मल की मोती ना बनती तो ना सही मिटटी में मिल जाती ,
काश में चांदनी रात होती इतनी शीतल की सुबह होते ही ढल जाती ,
काश में पानी का बुलबुला होती इतनी कोमल की छुते ही उसमे घुल जाती ,
काश में-में न होती चाहे फिर में गुलाब होती इतनी पवित्र की मुरझाने के बाद भी मेरी महक हर जगह को महकती ,
काश में एक लम्हा बनजाती न चाहकर भी सबको याद आती,
काश में-में न होती काश ,काश .................