Saturday, January 9, 2010

मेरे सपनो का शहर....


एक शहर ऐसा बनाऊ जहा सिर्फ खुशियों का डेरा हो ,एक शहर ऐसा बनाऊ जहा हर वक्त सवेरा हो,

जी करता हे एक शहर ऐसा बनाऊ जहा सिर्फ प्यार ही प्यार हो ,एक शहर जहा कोई न इंतज़ार हो,

एक शहर जहा जीने की चाह हो ,एक शहर जहा ज़िन्दगी का सार हो ,

वो शहर बनाना चाहती हु मैं जहा सपनो की खुली किताब हो ,जहा हकीकत में भी जीने का जज्बात हो,

एक शहर जहा मुस्कुराती सुबह हो ,एक शहर जहा कोई न अकेली रात हो ,

एक शहर जहा पूरा हर खवाब हो ,एक शहर जहा बिना पानी की बरसात हो ,

एक शाहर जहा मासूमियत ही मासूमियत हो ,एक शाहर जहा हर बचपन आजाद हो,

एक शहर जहा सब कुछ आसान हो ,एक शाहर जहा कोई न निराश हो,

एक शहर जो अपनों का शहर हो ,एक शहर जहा खुशियों की लहर हो ,

मेरा वो शहर जहा बस अपनों का प्यार हो हा वो शहर जिसका सपना दिन रात आता है मुझे,

वो शहर बना चाहती हु मैं जहा मेरे दिल की आवाज़ पहचान सकू ,वो शहर जहा खुदसे इन्साफ कर सकू,

वो शहर जहा भीड़ में अकेली न राहू बल्कि अकेलेपन में भी महफ़िल बनालू,

वो शहर जहा सपनों की वो दुनिया हो ,जिसे में अपने रोम रोम में सजा लू,

वो शहर जहा कोइ न पराया हो ,वो शहर जहा अपनों का ही साया हो,

वो शहर जहा में सबको अपना बनालू ,वो शहर जहा में सबकी दर्द मिटा दू,

वो शहर जहा में सबके अश्क शिन लू ,एक शहर जहा सबको मुस्कुराना सिखा दू ,

एक शहर जहा मैं सारी खुशिया अपनी बाहों में समेत सकू,एक शहर जहा मैं मैं बनके रह सकू,

बस वो शहर ही तो बनाना चाहती हु मैं जहा कोइ न उदासी हो ,न कोइ शिकवा ,न शिकायत न किसी की आँखों में नामी हो ,

बस मेरे सपनों का शहर बनाना चाहती हु ,हाँ बस ऐसा ही शहर बनाना चाहती हु मैं......



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